हमारा मिशन (Mission)
Progressive Association of Parents Awareness (PAPA NGO) का उद्देश्य अभिभावकों और छात्रों के अधिकारों को संरक्षित करना, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और निजी स्कूलों की मनमानी को समाप्त करना है।
हमारा मिशन है-
✅ 1. शिक्षा को भय नहीं, अधिकार बनाना।
किसी भी स्कूल, संस्था या व्यक्ति को अभिभावकों का शोषण करने का अधिकार नहीं है। हम शिक्षा में समानता और न्याय के लिए खड़े हैं।
✅ 2. अभिभावकों व छात्रों की आवाज़ को अधिकारिक मंच देना।
फ़ीस शोषण हो, TC रोकी जाए, RTE उल्लंघन हो, प्रवेश में भेदभाव हो, स्कूल बिना मान्यता के चल रहा हो, कॉपी, किताब, ड्रेस के लिए परेशान किया जा रहा हो, मानक के अनुसार शिक्षक नहीं हो, स्कूल मे खेल का मैदान नहीं हो-PAPA NGO हर शिकायत को गंभीरता से लेता है और आवश्यक कार्रवाई करवाता है।
✅ 3. RTI, लीगल सपोर्ट और एडवोकेसी के माध्यम से व्यवस्था में सुधार।
हम केवल शिकायत नहीं सुनते-
हम RTI लगाते हैं, जाँच करवाते हैं, क़ानूनी कार्रवाई करवाते हैं और आवश्यक होने पर उच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ते हैं।
✅ 4. पारदर्शी और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली की स्थापना।
हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले-
बिना डर, बिना भेदभाव, बिना मनमाने शुल्क-
✅ 5. डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से आधुनिक शिकायत प्रणाली।
हम एक ऐसे डिजिटल भारत की परिकल्पना करते हैं जहाँ-
अभिभावक घर बैठे शिकायत कर सकें,
शिकायत की ट्रैकिंग करें,
और न्याय समय पर मिले।
विज़न (Vision)
PAPA NGO का दीर्घकालिक लक्ष्य है-
- ऐसा भारत जहाँ शिक्षा व्यवस्था अभिभावक-हितैषी हो।
जहाँ स्कूल व्यापार न हों
बल्कि सेवा और शिक्षा का केंद्र बनें।
- हर बच्चे का अधिकार सुरक्षित हो।
किसी भी बच्चे को फ़ीस के नाम पर, TC रोककर या जाति-धर्म के आधार पर शिक्षा से वंचित न किया जाए।
- राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक संगठित अभिभावक शक्ति।
हम चाहते हैं कि हर जिले में PAPA NGO का एक मजबूत नेटवर्क हो-
जो मिलकर बच्चों और अभिभावकों के हित में काम करे।
- स्कूलों और अभिभावकों के बीच बेहतर संवाद और संतुलित संबंध।
जहाँ
स्कूल नियमों का पालन करें,
अभिभावक अधिकार से बोलें,
और शिक्षा प्रणाली स्वस्थ दिशा में आगे बढ़े।
- भ्रष्टाचार-मुक्त, पारदर्शी और न्यायपूर्ण शिक्षा व्यवस्था।
जहाँ
फ़ीस पारदर्शी हो,
किताबें/यूनिफॉर्म की अनिवार्यता न हो,
और हर स्कूल कानून के तहत काम करे।
“हम क्यों काम करते हैं?”
“क्योंकि हम मानते हैं-
हर माता-पिता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए,
और हर बच्चे की शिक्षा सुरक्षा हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।”
